UP पंचायत वोटर लिस्ट 2025-2026 & चुनाव जानकारी (जनवरी 2026 अपडेट)
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यू. पी. ग्राम पंचायत चुनाव: प्रधानी पद के लिए नियम, प्रक्रिया और पूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव ग्रामीण प्रशासन और लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें गांव के विकास, प्रशासन और जनहित के कार्यों के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव किया जाता है। इन पदों में से सबसे महत्वपूर्ण पद होता है प्रधानी (ग्राम प्रधान)। इस लेख में हम जानेंगे कि प्रधानी चुनाव क्या है, पात्रता क्या होती है, चुनाव प्रक्रिया कैसे होती है और प्रधान बनने के बाद जिम्मेदारियां क्या होती हैं।
ग्राम पंचायत और प्रधानी पद क्या है?
ग्राम पंचायत गांव के प्रशासन का सबसे निचला लेकिन सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक ढांचा है।
ग्राम प्रधान गांव का निर्वाचित प्रमुख होता है, जो गांव के विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी संभालता है।
प्रधानी चुनाव कौन लड़ सकता है?
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए सामान्यत: निम्न पात्रताएं होती हैं:
- उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए
- उम्मीदवार संबंधित ग्राम पंचायत का मतदाता होना चाहिए
- न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए
- कानूनी रूप से अयोग्य घोषित न हो
- आरक्षण नियम लागू होते हैं
- सामान्य
- ओबीसी
- एससी/एसटी
- महिला आरक्षण
प्रत्येक चुनाव में आरक्षण रोटेशन के आधार पर लागू किया जाता है।
चुनाव प्रक्रिया कैसे होती है?
यू. पी. ग्राम पंचायत चुनाव निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होते हैं:
- चुनाव कार्यक्रम की घोषणा
- मतदाता सूची का प्रकाशन
- नामांकन पत्र भरना
- जांच और नामांकन स्वीकृति
- प्रतीक आवंटन
- मतदान
- मतगणना और परिणाम जारी
मतदान प्रायः पेपर बैलेट के माध्यम से कराया जाता है।
मतदाता कैसे मतदान करते हैं?
- मतदाता सूची में नाम होना अनिवार्य है
- मतदान केंद्र पर पहचान पत्र आवश्यक होता है
- मतदान गुप्त मतपत्र के माध्यम से किया जाता है
ग्राम प्रधान की जिम्मेदारियां
ग्राम प्रधान गांव के कई महत्वपूर्ण कार्यों की देखरेख करता है, जैसे:
- गांव में सड़क, पानी, बिजली, स्वच्छता जैसी सुविधाएं
- सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन
- गरीब और पात्र लाभार्थियों का चयन
- पंचायत बैठकों का संचालन
- गांव के विकास प्रोजेक्ट्स की निगरानी
- राजस्व और फंड का सही उपयोग
प्रधान के अधिकार
- सरकारी फंड का उपयोग गांव के हित में करना
- पंचायत प्रस्ताव पारित करवाना
- अधिकारियों से समन्वय करना
- गांव के विकास प्रोजेक्ट शुरू करना
हालांकि यह सब कानूनी नियमों और पंचायत सदस्य अनुमोदन के तहत होता है।
प्रधानी पद का कार्यकाल
ग्राम प्रधान का कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है।
विशेष परिस्थितियों में पंचायत भंग या पुनर्निर्वाचन भी हो सकता है।
ग्राम पंचायत चुनाव में पारदर्शिता
चुनाव प्रक्रिया में:
- आचार संहिता
- खर्च सीमा
- नामांकन नियम
का सख्ती से पालन कराया जाता है ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सके।
ग्रामीण विकास में प्रधानी पद का महत्व
प्रधानी पद गांव के विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक संरचना को बेहतर बनाने में प्रमुख भूमिका निभाता है। यह लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करता है और जनता को सीधा निर्णय लेने की शक्ति देता है।
निष्कर्ष
यू. पी. ग्राम पंचायत चुनाव ग्रामीण लोकतंत्र की आत्मा हैं। प्रधानी पद न केवल एक जिम्मेदारी है, बल्कि गांव के सर्वांगीण विकास का माध्यम भी है। सही प्रतिनिधि का चयन करने से गांव की दिशा और विकास पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए मतदाताओं के लिए यह जरूरी है कि वे जागरूक रहकर अपने प्रतिनिधि का चयन करें।



